जनजाति बच्चें बने रग्बी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

कोई व्यक्ति एक बार यदि ठान लेता है, तो किसी भी क्षेत्रा मंे सपफलता प्राप्त कर सकता है। ऐसा ही कभी सेना अध्किारी सुरेन्द्र जैना ने सोचा और अपने प्रयास प्रारम्भ किया। इस हेतु उन्होंने सेना से सेवा-निवृत्ति ली और जनजाति बच्चों को रग्बी खेलना सिखाया। उडी़सा राज्य के वनवासी कल्याण आश्रम के बच्चों को रग्बी में इतना आगे बढ़ाया कि आज वे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुके है। जनजाति बच्चों में वैसे भी कौशल है, केवल कुछ प्रशिक्षण और स्पर्ध के रूप में अवसर मिलने पर उनकी प्रतिभा का परिचय होता है।

सुरेन्द्र जैना हाल ही में हिसार ;हरियाणाद्ध के गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पधरे थे। वनवासी कल्याण आश्रम हरियाणा के उपाध्यक्ष राम बाबू अग्रवाल ने उनका परिचय कराया। उन्होंने कहा कि सुरेन्द्र जैना ने 2004 में कोलकाता में रग्बी खेलना खेलना शुरू किया। वहां से राष्ट्रीय स्तर पर खेले। सुरेन्द्र जैना वर्तमान में वनवासी कल्याण आश्रम उडी़सा राज्य के खेल आयाम के उपाध्यक्ष है।

हिसार में आयोजित इस कार्यक्रम में क्रीडा भारती -हिसार के नारायण प्रसाद गिरी, हरियाणा प्रांत उपाध्यक्ष राम बाबू अग्रवाल, जिला अध्यक्ष सी. ए. राम निवास अग्रवाल, जिला उपाध्यक्ष नीरज गुप्ता, सचिव अनिल कुमार, सह-मंत्राी मनीष बिंदल, सुशीला देवी, कुसुम,  सी.ए.पर्व गुप्ता, अजय सैनी जैसे कई महानुभाव उपस्थित थे।

“Newletter”

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