सामुदायिक वनाधिकार, पेसा कानून और ग्राम सभा सशक्तिकरण के लिये कार्यशाला

मण्डला के गौंडी पब्लिक ट्रस्ट भवन में सामुदायिक वनाधिकार, पेसा कानून और ग्राम सभा का सशक्तिकरण पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ। परम्परागत जड़ीबुटी एवं वैकल्पिक चिकित्सा विकास परिषद एवं अनुसंधान केन्द्र मण्डला और वनवासी विकास परिषद महाकौशल के संयुक्त तत्वावधान से जबलपुर में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के प्रमुख वक्ता एवं अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर ने बताया कि सरकार के पास व्यक्तिगत वनाधिकार के दावे बहुत हुए है परन्तु सामुदायिक वनाधिकार प्राप्त करने हेतु कम आवेदन आये है। सामाजिक क्षेत्र के कार्यकर्ता और संस्थाओं ने ग्रामवासियों के साथ मिलकर सामुदायिक वन क्षे़त्र की सूक्ष्म कार्य योजना बनानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण ये है कि इसको ग्रामवासी ठीक से समझे और स्वयं पहल करे ये जरूरी है। श्री कुबेर ने अपनी बात पावर पोईन्ट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से कही।

आदिवासी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. शिवराज शाह ने ग्राम विकास के लिये पेसा कानून को मील का पत्थर बताया और कहा की वर्तमान में राजनीतिक कारणों से जनजाति समाज में अनेक संगठन इसका गलत व्याख्या करते है। जिसके चलते समाज और शासन के बीच टकराव की स्थिति बनती है। इन सबको देखते हुए सर्व आदिवासी समाज संगठन का गठन किया है। पर्यावरणविद डॉ. सरिता अग्निहोत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर अपनी बात कही।

कार्यशाला के संयोजक डॉ. गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि संविधान की पांचवी अनुसूची वाले जनजाति क्षेत्रों में लागू पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से न होने से स्थानीय स्वशासन का सपना अधुरा है। जागृति युवा संस्थान, जन सेवा समिति, स्वामी विवेकानंद युवा मण्डल, वनवासी कल्याण परिषद जैसे कई सामाजिक संगठन तथा बी.एस.डब्ल्यू. के छात्रछात्राओं ने इस कार्यशाला में भाग लिया।

आभार: सिटी भास्कर,

दैनिक भास्करजबलपुर

 

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