‘संत ईश्वर सम्मान’ अर्थात
निःस्वार्थ भावना से कार्यरत कार्यकर्ताओं का सम्मान

 

25 नवम्बर 2018  हम सब दिल्लीवासियों के लिये विशेष दिन रहा। यहाँ संत ईश्वर फाउण्डेशन द्वारा कुछ महानुभावों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा था। जनजाति क्षेत्रा में, देश के ग्रामीण क्षेत्रा में, महिला एवं बाल विकास के क्षेत्रा में जिन्होंने कुछ विशेष कार्य किया है ऐसे व्यक्तियों को प्रतिवर्ष संत ईश्वर पफाउण्डेशन ‘संत ईश्वर सम्मान’ से सम्मानित करता है। इसी समारम्भ में सामाजिक क्षेत्रा मे जिनका विशेष योगदान रहा है ऐसे महानुभावों को भी सम्मानित किया जाता है। देश भर में कार्यरत ऐसे व्यक्तियों का चयन करने में राष्ट्रीय सेवा भारती उन्हें सहयोग करती है।
वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्व उपाध्यक्ष श्री जलेश्वर ब्रह्म ;गुवाहाटीद्ध को जनजाति क्षेत्रा में उनके योगदान को देखते हुए सम्मानित किया गया। यह हम सबके लिये अत्यंत आनंद एवं हर्ष का विषय है। मध्य प्रदेश के झाबुआ के जनजाति क्षेत्रा में विकास कार्य हेतु कार्यरत शिवगंगा अभियान, त्रिपुरा के सिधेश्वरी सेवा मिशन और छत्तीसगढ़ के जशपुर क्षेत्रा में अपने जनजाति बंधुओं के बीच सेवाकार्य में कार्यरत श्री बभ्रुवाहन जी को इसी कड़ी में सम्मानित किया गया।


देश के बस्तर क्षेत्रा के वनवासी बन्धुओं के जीवन के बारे में हम सब जानते ही है कि वे किन परिस्थितियों का सामना कर रहे है। ऐसे कठिन क्षेत्रा में महिला जागृति हेतु कार्यरत सुश्री बुध्री ताती को उनके सामाजिक क्षेत्रा में महिला जागृति के कार्य के लिए सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के लातूर स्थान पर दिव्यांग बालकों के विकास हेतु कार्यरत संवेदना ट्रस्ट को भी उनके विशिष्ट कार्य हेतु सम्मानित करना यानि निःस्वार्थ भावना का सम्मान करना है।
उपरोक्त सभी व्यक्ति एवं संस्था तथा अन्य भी कई संस्था के कार्यकर्ता ‘समाज में सम्मान प्राप्त हो’ इस हेतु कार्य नहीं करते परन्तु समाज का यह कर्तव्य है कि ऐसे व्यक्तियों का उचित सम्मान हो और कार्य को आगे बढ़ाने में सहयोग मिले। यह कार्य संत ईश्वर पफाउण्डेशन पिछले कई वर्षों से कर रहा है, जो सच में सराहनीय है।

We Are Social