वनवासियों की अद्भुत चिकित्सा पद्धति
साप ने काटा, पर बालक मरा नही


कर्नाटक की प्रांत महिला प्रमुख सुमंगला और जिले की पुट्मा के साथ मैं, 4-नवंबर 18 को दम्मनकट्टै ;तालूका मैसूरद्ध में कार्यक्रम आयोजित करने गई। गांव का एकल विद्यालय देखा और रात को ग्राम समिती की बैठक तय की। इतने में वहाँ की महिला कार्यकर्ता बसम्मा भागकर आयी और कहने लगी,‘एक लड़के को सांप ने काटा है, मैं देखकर आती हूँ, करके भागी’, हम भी वहाँ गए। सोला वर्ष के लड़के को सांप ने काटा था और उसे शिवण्णा नाम के व्यक्ति उपचार कर रहे थे। हमारी ध्ड़कने बढ रही थी, ऐसे में मेरी मूंह से निकल गया ‘अस्पताल लेकर जाना चाहिए’। लड़के को दवायी देते, छाती पर हाथ रख शिवण्णा जी बोले, ‘मैं ही डाक्टर हूं’। उनका आत्मविश्वास प्रशंसनीय था।

गांव के लोगों ने लकड़ी ईकठ्ठा कर आग लगाई और वहां उस लड़के को पास में बिठाकर हंसते, नाचते, गाने लगे। मुझे इस बात से बड़ा आश्चर्य हुआ। एक तरपफ लडके को सांप ने काटा है, उसके जीवन-मरण का प्रश्न है और लोग नाच-गान कर रहे है! ये कोई आनंद व्यक्त करने का समय है ? मैंने लोगों से पूछा,‘ये तो दुख का प्रसंग है और आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? शिवण्णा बोले, उस लड़के को पूरी रात सोने नहीं देना और वह आनंद में रहे ऐसा करना।

मैं भी उनके साथ रात 12 बजे तक बैठी रही। उन्होंने कहा आप विश्रांती करो, पर मुझे नींद नहीं आई, रात भर करवटें बदलते रहीे। भोर में जब आँख खूली तो मूंह भी नहीं धेया और तुरन्त उस लड़के को देखने गई।

क्या आश्चर्य !, वहां देखा तो ‘लड़का स्वस्थ’ देखा। मैंने चैन की सांस ली। उस लड़के की माता भी बड़ी खूश थी। हम सबको बहुत आनंद हुआ। उसका वर्णन करना कठिन है। उस लड़के के पांव को सांप ने लपेट लिया था, हिम्मत से उसने दोनों हाथों से खींचकर उसे पफेंक दिया। सांप ने काटने के कारण उस लड़के की परिस्थिति बड़ी गंभीर हो गई थी। परन्तु रात भर प्राकृतिक उपचार करने के बाद सुबह लडका हमें ही पूछ रहा था – कैसी हो?

– कौसल्या,
क्षेत्रीय महिला प्रमुख,
वनवासी कल्याण आश्रम

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