महिला विश्व
देवगिरी प्रांत के जनजाति क्षेत्र में महिलाएँ कार्यरत

वनवासी कल्याण आश्रम देवगिरी प्रांत ने महिलाओं के बीच कार्य को अधिक बल देने हेतु विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया।

सामाजिक समरसता – एक अनुकरणीय पहल

महाराष्ट्र के परिवारों में महिलाओं के हलदी-कुमकुम कार्यक्रम का बड़ा महत्व है। इस निमित्त महिलाएं एकत्रित होती है और एक दूसरे को कुमकुम लगाते हुए वस्त्र अथवा वस्तुएं भेट देती है। यह एक मंगल प्रसंग माना जाता है। पारोला गांव में कार्यकर्ताओं ने ऐसे ही एक कार्यक्रम का आयोजन किया। विशेष यानि इस कार्यक्रम में पारधी समाज तथा पावरा जनजाति की बहनों को भी निमंत्रित किया था। सामाजिक समरसता के रूप में देंखे तो यह एक अनुकरणीय पहल थी। धरणगांव में भी महिला समिति है। यहां के हलदी-कुमकुम कार्यक्रम में 287 बहनें आयी थी। इसमें कोई सब्जी बेचनेवाली बहन, तो कोई महिनत-मजदूरी करनेवाली बहनें भी आयी थी।

पानी की समस्या
महिलाओं के हलदी-कुमकुम का कार्यक्रम चल ही रहा था कि अचानक कुछ वनवासी बहने आधे में उठ कर चली गई। पूछताछ करने पर पता चला कि म्युनिसिपालटी की ओर से जो पानी व्यवस्था है उसका समय हो जाने के कारण बहने पानी भरने तुरन्त चली गई। यह जनवरी मास की घटना है। यदि जनवरी मास में इस प्रकार से पानी के बारे में किल्लत है तो मई-जून मास में वर्षा आने तक दिन कैसे कटेंगे? इस गांव में पंद्रह दिन में एक बार पानी आता है। हमें मैट्रो सिटी में रहकर महाराष्ट्र के सुखाग्रस्त क्षेत्र की समस्या का अंदाज ही नहीं आता। जनजाति बहनों के कष्टमय जीवन का अंदाज तो उन्हें मिलने पर ही आता है।

‘बहिणाबाई चैधरी महोत्सव’ में वनवासी कल्याण आश्रम
जलगाँव यह देवगिरी प्रांत का केन्द्र है। यहाँ प्रतिवर्ष ‘बहिणाबाई चैधरी महोत्सव’ का आयोजन होता है। बहिणाबाई चैधरी यह महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्र की प्रसिद्ध कवियत्री थी। लौकिक रूप में उनकी कोई शिक्षा नही हुई परन्तु एक किसान परिवार में जन्म ली हुई महिला की मराठी कविताएं बहुत प्रसिद्ध है। साहित्य जगत में इस महिला का बड़ा आदर है। उनकी स्मृति में एक महोत्सव जलगांव में आयोजित होता है। लाखों व्यक्ति इसमें आते है। वहां वनवासी कल्याण आश्रम ने एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। एक बाँस की झुपडी बनाकर वनवासी परिवेष में सबको अपने कार्य की जानकारी दी। ग्रामीण समाज, जलगांव नगर के प्रतिष्ठित व्यक्ति, कई शासकिय अधिकारी सहित हज़ारों लोगों ने उसे देखा और सराहा।

देवगिरी प्रांत का बारीपाडा गांव, ग्राम विकास के क्षेत्र में बड़ा ही प्रसिद्ध है। वहां कल्याण आश्रम के प्रयासों से जंगल, पानी, कृषि से जुडे़ कई काम चल रहे है। वहां के इंद्रायणि चावल बडे़ प्रसिद्ध है। कार्यकर्ताओं ने जलगांव में आयोजित इस उत्सव में इंद्रायाणि चावल की बिक्रि भी की। वह चावल की बिक्रि नहीं परन्तु कल्याण आश्रम के कार्य का परिचय जो था। यहां पर भी महिला समिति कार्यरत थी।

महिला कार्य बढ़ रहा है…..
पहले परिचय करना, किसी कार्यक्रम निमित्त महिलाओं को एकत्रित करना और कार्य की जानकारी देते हुए कल्याण आश्रम के कार्य में सक्रिय करना – ये क्रम वर्षों से चल रहा है। धीरे-धीरे महिला कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ने लगती है।
– माधवी जोशी
(अखिल भारतीय महिला कार्य प्रमुख)

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