शहीद जादोनांग छात्रावास का दसवां वर्ष

वनवासी कल्याण आश्रम – दिल्ली द्वारा संचालित बालक छात्रावास को पिछले मास में दस वर्ष पूर्ण हुए। इस निमित्त छात्रावास पर बालकों के साथ नगरजनों का एक एकत्रिकरण रखा गया। पुरानी कई स्मृतियाँ ताज़ा हुई। आज से दस वर्ष पूर्व जब दिल्ली में पूर्वात्तर के बालकों के अध्ययन हेतु एक बालक छात्रावास प्रारम्भ करना चाहिए का विचार सामने आया तो सबको काम थोड़ा कठिन लग रहा था। कार्यकर्ता कहाँ से आएंगे ? प्रतिमास इतना खर्च कैसे जुटा पायंगे ? जैसे कई प्रश्न सामने आए। परन्तु कहते हैं की जो चलना तय करते है, उन्हें मार्ग मिलता है। कुछ ऐसा ही हुआ।


प्रारम्भ में बादली गाँव में 18 बच्चों के साथ एक छोटे से किराये के मकान में छात्रावास शुरू हुआ। स्थानीय कार्यकर्ता और विशेषतः परिवार की महिलाएँ बालकों का बहुत ख्याल रखती थी। समय चलता गया और कुछ वर्ष के पश्चात नरेला में हमने एक नये मकान में छात्रावास बदल दिया। पहले से संख्या भी बढ़ी। छात्रावास की समिति भी बनी। धन एकत्रिकरण के प्रयास भी चले। बालकों के अध्ययन में विशेष ध्यान देने हेतु कोचिंग की भी योजना बनी। बालकों ने भी पढ़ाई, कला एवं खेल के क्षेत्र में कई ऊचाईयाँ प्राप्त की। छात्रावास समिति के अध्यक्ष विनू सैनी की अध्यक्षता में आज 13 कार्यकर्ताओं की प्रबंधन समिति कार्य कर रही है। जिनके प्रयासों से नरेला एवं आसपास से ग्रामीण क्षेत्रा में अपने कार्य की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
प्रेषक: आनंद भारद्वाज
सह-सचिव
वनवासी कल्याण आश्रम-दिल्ली

 


 

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