जशपुर में पहली बार हुए D-SARDA तकनीक से हर्निया के आपरेशन।

धर्मार्थ चिकित्सालय वनवासी कल्याण आश्रम में चल रहे शल्य क्रिया शिविर में D-SARDA (डी सारदा) तकनीक से हर्निया के कई आपरेशन किये गए। यह नवीनतम तकनीक कई देशों में प्रचलित हो रही है, भारत मे भी इसका प्रचलन बढ़ रहा है। अभी जितनी भी हर्निया आपरेशन की तकनीकें विश्व भर में प्रचलित है, उनमे हर्निया को ठीक करने के लिए एक कृत्रिम जाली लगाई जाती है, जो कि हर्निया को ठीक करने का काम करती है। पर डी सारदा तकनीक में कृत्रिम जाली की जगह पर शरीर के ही स्नायु को जाली की तरह उपयोग ला कर हर्निया का निदान किया जाता है, कृत्रिम जाली लगा कर करने की तुलना में इस तकनीक से आपरेशन करने पर रुग्ण को आपरेशन पश्चात पीड़ा में कम होती है, रुग्ण आपरेशन के 8 से 12 घंटे के बाद चल सकता है, सामान्य भोजन कर सकता है और जल्दी घर जा रोजमर्रा के कार्य कर सकता है, जाली लगाने की तुलना में इस उन्नत तकनीक का सबसे बड़ा लाभ है संक्रमण (इन्पफेक्शनद्) की कमी, कृत्रिम जाली लगाने के बाद संक्रमण का खतरा कई दिनों तक बना रहता है और संक्रमण होने की स्थिति में पुनः आपरेशन करना पड़ता है, इस तकनीक में चूंकि शरीर के अपने ही स्नायु का उपयोग होता है अतः संक्रमण का खतरा न्यूनतम होता है। आॅपेरशन के पश्चात पुनः हर्निया होने की संभावना दोनो ही तकनीकों में करीब एक सी ही होती है। इस तकनीक से डा. अनामय बीडवई ने चार हर्निया के आपरेशन किये, इसके अलावा 7 और मेजर आपरेशन हुए। निश्चेतना रायपुर से पधरे विशेषज्ञ डा. अनीश गोलछा ने दी। इस शिविर में शल्य क्रिया के अलावा रायपुर से पधारे देश भर में ख्यात वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. शम्भू बनजई ने परामर्श सेवा दी जिसका जशपुर नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से आये रोगियों ने लाभ उठाया। शिविर दिनाँक 17 जून तक आयोजित था।

 


 

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