PUBLICITY & PUBLICATION (प्रचार- प्रसार, प्रकाशन)

विचारों का प्रचार, कार्य का प्रचार
जानकारियों का संकलन कर सम्बन्धित क्षेत्रों में संप्रेषण को प्रचार-प्रसार कहते है। भारत की यह प्राचीन परम्परा है। नारद मुनि इसके आदर्श है। वर्तमान युग के अनुरूप अद्यतन सभी व्यवस्थाओं का उपयोग कर जनजाति जगत से जुड़ी जानकारियों के प्रचार हेतु वनवासी कल्याण आश्रम सदैव प्रयासरत है।

अपने विचार, गतिविधियाँ, उपक्रम, कार्यक्रम का प्रचार होना आवश्यक है। हमें इस माध्यम से वनवासी क्षेत्र की समस्या तथा चुनौतियों को भी उजागर करना है। न केवल नगरीय कार्यकर्ता अपितु जनजाति कार्यकर्ता भी प्रचार के विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करे, यही अपेक्षित है और समाज इसका अनुभव भी कर रहा है।

समाचार के क्षेत्र में हमें सदैव समय के साथ चलना होता है। इसलिए ऐसे माध्यमों का उपयोग करना है जो युगानुकूल हों। आज अन्तरताने (इन्टरनेट) का युग है। सभी जानकारियों को तत्काल सही स्थान पर पहुँचना होता है। देश विभिन्न प्रादेशिक भाषाओं में पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करना, साहित्य का प्रकाशन करना, पावर-पोईन्ट प्रजेन्टेशन, सी.डी., वेब साईट का प्रयोग करना जैसे कई माध्यमों का हम उपयोग करते है। कार्यकर्ता पत्रकार वार्ता भी आयोजित करते है। आज हम प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में जितना सक्रीय है, उससे कई अधिक सक्रीय होने की सम्भावना भी है। प्रचार-प्रसार का आकाश विशाल है और क्षितिज विस्तीर्ण है।

 

 

प्रचार- प्रसार वार्ता

बंगलुरू में प्रचार आयाम का प्रशिक्षण वर्ग सफलतापूर्वक सम्पन्न

बंगलुरू में प्रचार आयाम का प्रशिक्षण वर्ग सफलतापूर्वक सम्पन्न ‘‘वर्तमान समाज में जनजाति समाज की प्उंहम (इमेज) एक है और त्मंसपजल(रियालिटी) एक है। हमें इसके लिये काम करना है। जनजाति...
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दिल्ली में विचार गोष्ठी का आयोजन

दिल्ली में विचार गोष्ठी का आयोजन दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने रोहिणी जिला में 11 नवम्बर 2018 को एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें अग्रवाल विकास परिषद के अध्यक्ष राम...
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