बढ़ते चलें, बढ़ते चलें

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बढ़ते चलें, बढ़ते चलें

 

बढ़ते चलें, बढ़ते चलें,
इस ध्येय पथ पर आज हम
बढ़ते चलें, बढ़ते चलें ।। धृ. ।।

संकटों से हम न डरते
क्यों डरें आँधी से हम,
हो भले प्रतिकूल सारा
हार ना मानेंगे हम,
संगठन का मंत्र लेकर
चल पड़े हैं आज हम ।। 1 ।।
इस ध्येय पथ पर आज हम…..

दृढ़ भावना मन में बसी
नित प्रेरणा संबल बनी
बस ! एक ही धुन लक्ष्य की
बस ! एक ही धुन कार्य की
ना रूके हम, ना थके
अनथक चलें, अविरत चलें ।। 2 ।
इस ध्येय पथ पर आज हम….

कोई कहे या ना कहे
इस मार्ग पर चलते रहे
ना शब्द से स्वागत कहीं
और फूलमाला ना कहीं
निरपेक्षता का भाव लेकर
साधना चलती रहें ।। 3
इस ध्येय पथ पर आज हम…

राष्ट्र के निर्माण में है
साधकों की यह तपस्या
ले चलें इस कार्य को
वनक्षेत्र में जो कार्यकर्ता
घनघोर अंधेरा भलें हो !
तेज के है पुंज हम ।। 4 ||
इस ध्येय पथ पर आज हम……

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