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ये गंगा जो बहती है

विभिन्न आयामों के बल पर 

सातत्यपूर्ण जो कार्य करे

खेलो खेलो रे ! खेलो खेलो रे !

सत् विचार की नीव हमारी

कुरूक्षेत्र के शंखनाद

अब जागो……जागो रे जागो वनवासी

जन-जन जिनकी पुजा करतॆ हैं

चरैवेति चरैवेति यही तो मंत्र है अपना

दूर दूर गॉंवों में जाएं वनबन्धु को मिलाने

जाग उठा वनवासी अब तो, जाग उठा वनवासी

वनवासी का संगठन कर ध्येय मार्ग पर चलते

वैभवशाली भारत के हम स्वप्न देखती महिलाएं

धरती माता कितनी अच्छी

आनंद भरें सबके जीवन में , जीवन के दिन चार

खेल खिलाड़ी खेल

शारदे वर दें ! हमें करुणामयी आशिष दे

भारत बसता है गावों में, चले आज हम गाँव

वनवासी वीरों की गाथा, आज सभी को सुनाएँ।

ऐक्य बोध हो , ऐक्य बोध हो !

नगर ग्राम वन के हृदयों में अपनेपन का भावजागरण

हिन्दू विचार का हो सम्यक् समूह मंथन

संकल्प करें कृतीशील बने

हे पुरूषार्थि ! कर्मयोगी हे ! प्रेरक तुम सब के, प्रेरक तुम सब के

मेरे वनवासी है महान

कार्य करें वह कार्यकर्ता

कौन आदि है, सब अनादि है

तरूणाई का नूतन जागर सूर्य तेज सा छाया

ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे

कुरूक्षेत्र के शंखनाद का अर्थ समझना होगा

यही मंत्र है यही साधना ...

जागृति का अभियान चल पड़ा

चाहे आंधी कितनी आये

मन में गौरव है अतीत का अमृतकाल मनाएं

बढ़ते चलें, बढ़ते चलें

श्रद्धा भाव जो दृढ करना है

स्वधर्म रक्षा करनी हमको ...

ये गंगा जो बहती है
विभिन्न आयामों के बल पर 
सातत्यपूर्ण जो कार्य करे
खेलो खेलो रे ! खेलो खेलो रे !
सत् विचार की नीव हमारी
कुरूक्षेत्र के शंखनाद
अब जागो……जागो रे जागो वनवासी
जन-जन जिनकी पुजा करतॆ हैं
चरैवेति चरैवेति यही तो मंत्र है अपना
दूर दूर गॉंवों में जाएं वनबन्धु को मिलाने
जाग उठा वनवासी अब तो, जाग उठा वनवासी
वनवासी का संगठन कर ध्येय मार्ग पर चलते
वैभवशाली भारत के हम स्वप्न देखती महिलाएं
धरती माता कितनी अच्छी
आनंद भरें सबके जीवन में , जीवन के दिन चार
खेल खिलाड़ी खेल
शारदे वर दें ! हमें करुणामयी आशिष दे
भारत बसता है गावों में, चले आज हम गाँव
वनवासी वीरों की गाथा, आज सभी को सुनाएँ।
ऐक्य बोध हो , ऐक्य बोध हो !
नगर ग्राम वन के हृदयों में अपनेपन का भावजागरण
हिन्दू विचार का हो सम्यक् समूह मंथन
संकल्प करें कृतीशील बने
हे पुरूषार्थि ! कर्मयोगी हे ! प्रेरक तुम सब के, प्रेरक तुम सब के
मेरे वनवासी है महान
कार्य करें वह कार्यकर्ता
कौन आदि है, सब अनादि है
तरूणाई का नूतन जागर सूर्य तेज सा छाया
ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे
कुरूक्षेत्र के शंखनाद का अर्थ समझना होगा
यही मंत्र है यही साधना ...
जागृति का अभियान चल पड़ा
चाहे आंधी कितनी आये
मन में गौरव है अतीत का अमृतकाल मनाएं
बढ़ते चलें, बढ़ते चलें
श्रद्धा भाव जो दृढ करना है
स्वधर्म रक्षा करनी हमको ...
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