ये गंगा जो बहती है
छल-छल, कल-कल, छल-छल
संस्कृति का जो गान सुनाती,
हर-पल पल-पल हर-पल
ये गंगा जो बहती है….
व्यक्ती में देखे हम
ज्ञान, गुणों की सरिता
नर से नारायण होता है,
मेरा भारत कहता
पुण्य सलीला गंगा कहती
सत्य मार्ग पर चल ।। 1।।
वनवासी जीवन में,
संस्कारों की धारा
गौरवशाली परम्परा का,
भव्य अतीत हमारा
पवित्र तन निर्मल मन
जैसे गंगाजल ।।2।।
मेरा है, अपना है,
वनवासी से नाता
धरती की संतान सभी है
एक रक्त का नाता
गंगा तट के केवट कहते
संस्कृति पथ पर हम ।।3।।
