श्रद्धा भाव जो दृढ करना है

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श्रद्धा भाव जो दृढ करना है

श्रद्धा भाव जो दृढ करना है
श्रद्धा भाव जो दृढ करना है …. ।। धृ. ।।

भज सत्संग चला गावों में
जागृत करता ग्राम जनों को
धर्म सभा देखो कैसे
हिन्दू शक्ति का शंखनाद हो
हिन्दू कहे हम उंचे स्वर में
बस कहना और करना क्या है ।। 1 ।।

साधु-संत सब आए वन में
जनजागृति का अलख जगाने
घर वापस आए उन सबको
अपना कहकर स्वागत करने
समाजरूपी ईश्वर के ही
सत्य स्वरूप दर्शन करना है ।। 2 ।।

परिवर्तन की इस बेला में
हम सब मिलकर कार्य करेंगे
संस्कृति की रक्षा करने को
जीवन का बलिदान करेंगे
यज्ञकुंड की समिधा बनकर
जीवन धन्य हमें करना है ।।3।।

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