INTER-ORGANISATION COMMUNICATION (संपर्क)

वनवासी कल्याण संपर्क आश्रम का कार्य 1952 में प्रारम्भ हुआ। समय के साथ उसका क्रमिक विकास हुआ। कार्य की आवश्यकतानुसार नये नये आयाम जुड़ते गए। जैसे जनजाति क्षेत्र में हम काम कर रहे है वैसे कई व्यक्ति एवं संगठन भी जनजाति बन्धुओं के बीच अपनी क्षमतानुसार विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है। इनमें कुछ सकारात्मकता के साथ कार्य कर रहे है तो कुछ भ्रातियाँ फैलाने से लेकर समाज घातक कार्य में कार्यरत है।

समाज की सज्जन शक्ति का सम्पर्क कर उसे समाजहित में एकत्रित करने के आशय वनवासी कल्याण आश्रम सकारात्मकता के साथ जो जो व्यक्ति, संस्थाएँ, संगठन कार्यरत है उनके सम्पर्क करता है। चर्चासत्रों का आयोजन करता है। इसके कारण विचारों का आदान-प्रदान होता है। अच्छे कार्यो के लिये अनुकूल वातावरण निर्माण होता है, जिसके कारण वनवासी बन्धुओं को लाभ हेाता है। इसमें कुछ संगठन ऐसे है नगरवासी चला रहे है तो कुछ ऐसे है जो स्वयं वनवासी व्यक्ति चला रहे है। उन सभी का विश्वास बढ़ता है।

सम्पर्क आयाम के आयाम द्वारा –
चर्चासत्र, परिसंवाद, सम्मेलनों का आयोजन होता है।
संस्थाओं के बीच सम्पर्क बढ़ता है।
चर्चा के माध्यम से विचारों का आदान प्रदान होता है।
संस्थाएँ एक-दूसरे के प्रकल्पों को देखने जाते है।
कार्य के सन्दर्भ में परस्पर सहयोग का वातावरण बढ़ता है।
सम्पर्क आयाम का सूत्र है – हमारा गोत्र जनजाति, मंत्र समन्वय और उद्देश्य द्रुतगति से जनजाति समाज का सर्वांगीण विकास।

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